कभी-कभी कुछ फिल्में सिर्फ अपनी कहानी से नहीं, बल्कि अपने विचारों से भी चर्चा में आ जाती हैं। परेश रावल की हालिया रिलीज़ फिल्म ‘The Taj Story’ ऐसी ही एक कहानी है, जिसने रिलीज़ के साथ ही देशभर में बहस और दिलचस्पी दोनों पैदा कर दी। यह फिल्म एक ऐसे आम आदमी की जिद, उसकी जिज्ञासा और उसके विश्वास की कहानी है जो ताजमहल के इतिहास को लेकर अदालत तक जा पहुंचता है।
ताजमहल की कहानी पर अदालत में केस

The Taj Story की कहानी एक व्यक्ति विष्णु दास (परेश रावल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ताजमहल का टूर गाइड है। लेकिन एक दिन उसके मन में सवाल उठता है कि क्या ताजमहल की कहानी वैसी ही है जैसी हमें बताई गई है? इसी सवाल के जवाब की तलाश में वह अदालत तक जा पहुंचता है। यह सफर एक सामान्य व्यक्ति से एक जुनूनी खोजी तक के उसके बदलाव को दिखाता है।
बॉक्स ऑफिस पर पहले हफ्ते का प्रदर्शन
‘The Taj Story’ ने पहले हफ्ते में ₹10.7 करोड़ की कमाई की। फिल्म ने ओपनिंग वीकेंड में ₹5.75 करोड़ कमाए थे, जो दर्शकों की जिज्ञासा और विवाद दोनों का असर था। हालांकि सातवें दिन इसकी कमाई में 53% की गिरावट आई और यह सिर्फ ₹70 लाख ही कमा पाई। इसके बावजूद, एक कोर्टरूम ड्रामा के तौर पर इसने अच्छा प्रदर्शन किया है।
थिएटरों में ऑक्युपेंसी और दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म की सातवें दिन की ऑक्युपेंसी 10.46% रही। सुबह के शो में 5.29%, दोपहर में 10.76%, शाम में 10.76%, और रात के शो में 15.01% दर्शक पहुंचे। ये आंकड़े बताते हैं कि विवादों के बावजूद लोगों में फिल्म को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
विवादों से घिरी ‘The Taj Story’
The Taj Story के पोस्टर के रिलीज़ होते ही विवादों ने जन्म लिया। मोशन पोस्टर में परेश रावल को ताजमहल का गुंबद हटाते हुए दिखाया गया है, जिसके अंदर से भगवान शिव की मूर्ति निकलती है। पोस्टर के साथ लिखा गया था“What if everything you’ve been taught is a lie? The truth isn’t just hidden; it’s being judged.”
इस पोस्टर के बाद फिल्म पर “तेजो महालय थ्योरी” को बढ़ावा देने का आरोप लगा। हालांकि निर्माताओं ने सफाई दी कि यह फिल्म धार्मिक भावनाओं से जुड़ी नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति की खोज और अदालत के संघर्ष की कहानी है।
परेश रावल का दमदार अभिनय
परेश रावल ने इस फिल्म में विष्णु दास के रूप में शानदार अभिनय किया है। उनका किरदार एक गाइड से लेकर एक सच्चाई की खोज में लगे व्यक्ति तक का सफर दिखाता है। कोर्टरूम के सीन में रावल का संवाद और भावनाओं का मिश्रण इस फिल्म की जान हैं। उनके साथ अमृता खानविलकर, नमित दास, जाकिर हुसैन और स्नेहा वाघ जैसे कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं से फिल्म को गहराई दी है।
The Taj Story’ की थीम और संदेश

फिल्म का मकसद सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि कैसे एक आम व्यक्ति सच्चाई की खोज में समाज और व्यवस्था से टकरा जाता है। यह कहानी विश्वास बनाम तर्क, इतिहास बनाम साक्ष्य और इंसान बनाम व्यवस्था की लड़ाई को बड़े परदे पर जीवंत करती है।
विवादों के बावजूद दर्शकों की दिलचस्पी
भले ही फिल्म ने कई लोगों को नाराज़ किया, लेकिन इसने एक बात साफ कर दी लोग अब ऐसी कहानियों में दिलचस्पी ले रहे हैं जो सोचने पर मजबूर करें। ‘The Taj Story’ एक ऐसी फिल्म है जो न केवल सवाल उठाती है, बल्कि उन सवालों को भावनाओं के साथ जोड़ती है।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और फिल्म रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे फिल्म देखने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें।
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