हम सभी कभी न कभी अपने काम या कमाई को देखकर दूसरों से तुलना करते हैं। सोशल मीडिया पर “पानीपुरी वाला vs IT जॉब वाला” जैसे रील्स इसका सबूत हैं। Brat Movie भी इसी भावना को आधार बनाती है। इसमें कृष्णा उर्फ क्रिस्टी (डार्लिंग कृष्णा) एक गिग वर्कर है, जो अपनी सीमित आमदनी और संघर्षपूर्ण जीवन से परेशान है। एक दिन वह देखता है कि एक कुत्ता मर्सिडीज में घूम रहा है, जबकि वह खुद धूप में पसीना बहा रहा है यहीं से उसके भीतर की हताशा और जलन उसे गलत राह पर ले जाती है।
क्रिकेट बेटिंग की खतरनाक दुनिया

Brat Movie क्रिस्टी को क्रिकेट का गहरा ज्ञान है और वह रिस्क लेने वाला इंसान है। यही कारण है कि वह अवैध क्रिकेट बेटिंग में कूद जाता है। वह बल्लेबाज़ों की कमजोरियों, फील्ड सेटअप और टीम कॉम्बिनेशन को ध्यान में रखते हुए पैसे कमाने की कोशिश करता है। फिल्म का यह हिस्सा रोमांच से भरपूर है, और यहां शशांक का निर्देशन और डार्लिंग कृष्णा का परफॉर्मेंस दर्शकों को बांधे रखता है।
निर्देशन: शशांक की नई राह
डायरेक्टर शशांक, जिन्होंने पहले मोग्गिना मानसु और कृष्णन लव स्टोरी जैसी संवेदनशील फिल्में दी हैं, इस बार एक अलग रास्ता अपनाते हैं। Brat Movie में वे पारंपरिक मनोरंजन देने की कोशिश करते हैं, बिना किसी स्पष्ट ब्रेक के कहानी को लगातार आगे बढ़ाते हैं। हालांकि कुछ जगह स्क्रिप्ट थोड़ी कमजोर लगती है, लेकिन कहानी की गति दर्शकों को जोड़े रखती है।
महिला किरदार और भावनात्मक जुड़ाव की कमी
मनीषा कंदकूर ने फिल्म की नायिका का किरदार निभाया है, लेकिन उनका Brat Movie एंट्री सीन अचानक लगता है। उनके और क्रिस्टी के बीच का भरोसा जल्दबाज़ी में दिखाया गया है, जिससे भावनात्मक जुड़ाव की गहराई कम महसूस होती है। फिर भी, निर्देशक ने उनके किरदार को एक संकट में डालकर कहानी में नया मोड़ लाने की कोशिश की है।
लालच, भ्रष्टाचार और इंसानी फितरत
Brat Movie का असली स्वाद इसके साइड किरदारों से आता है। रमेश इंदिरा ने एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी रविकुमार का किरदार निभाया है, जो पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वहीं, ड्रैगन मंजू “डॉलर मणि” के रूप में अपनी भूमिका में शानदार हैं। उनका कैरिकेचर जैसा अंदाज दर्शकों को हंसाता भी है और डराता भी। फिल्म की खूबसूरती यह है कि यह पैसों की भूख और इंसानी कमजोरियों पर गहरा व्यंग्य करती है।
नैतिकता बनाम स्वार्थ की लड़ाई
Brat Movie का सबसे दिलचस्प हिस्सा क्रिस्टी और उसके पिता महादेवैया (अच्युत कुमार) के बीच की बहसें हैं। एक ओर पिता हैं, जो ईमानदारी को सबसे ऊपर मानते हैं, और दूसरी ओर बेटा, जो चकाचौंध भरी ज़िंदगी चाहता है। लेकिन फिल्म यहां अपनी स्थिति साफ नहीं कर पाती। यह नैतिकता और स्वार्थ के बीच झूलती रहती है। आख़िर में, क्लाइमेक्स थोड़ा अविश्वसनीय लगता है, जो कहानी की गंभीरता को हल्का कर देता है।
अभिनय और भावनाओं का असर

डार्लिंग कृष्णा ने एक शांत, व्यावहारिक और आत्मकेंद्रित किरदार को बखूबी निभाया है। यह भूमिका उन्हें उनके पुराने “लवर बॉय” इमेज से बाहर निकालती है। फिल्म के संवाद, खासकर पिता-पुत्र के बीच के टकराव, सोचने पर मजबूर करते हैं। हालांकि कहानी कई जगह मजबूत होती दिखती है, परंतु अंत में वह साहसिक मोड़ लेने से कतराती है।
अंतिम विचार: खामियों के बावजूद असरदार
Brat Movie पूरी तरह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन इसमें कुछ ऐसा है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। यह दिखाती है कि जब इंसान पैसा कमाने की दौड़ में नैतिक सीमाएं पार कर जाता है, तो उसका अंत किस दिशा में जा सकता है। शशांक की कहानी, डार्लिंग कृष्णा का अभिनय, और फिल्म के व्यंग्यात्मक दृश्य इसे एक दिलचस्प अनुभव बनाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिव्यू केवल मनोरंजन और जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और फिल्म के निर्माताओं या किसी संस्था की आधिकारिक राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
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