Bachat Lamp Yojna: कम खर्च में ज्यादा रोशनी देने वाली भारत की सबसे सफल ऊर्जा-बचत योजना

भारत में लगातार बढ़ती बिजली खपत और महंगे बिजली बिलों की समस्या हर घर महसूस करता है। ऐसे समय में Bachat Lamp Yojana ने लोगों को कम कीमत में ज्यादा रोशनी और बेहतर ऊर्जा-दक्षता का भरोसेमंद समाधान दिया। इस योजना ने न केवल बिजली के खर्च को कम किया बल्कि देश में ऊर्जा बचत को एक बड़े आंदोलन में बदल दिया।


Incandescent Bulbs से होने वाली ऊर्जा बर्बादी और नई रोशनी की जरूरत

भारत में वर्षों तक Incandescent Bulbs यानी सामान्य पीले बल्बों का उपयोग होता रहा। यह बल्ब केवल 5 प्रतिशत बिजली को रोशनी में बदलते हैं, बाकी 95 प्रतिशत ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाती है। यही कारण है कि इन बल्बों के चलते बिजली का बिल बढ़ता है और बिजली उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

इस समस्या का समाधान Compact Fluorescent Lamps (CFLs) के रूप में आया, जो एक ही स्तर की रोशनी देने के लिए सिर्फ एक-पांचवीं बिजली का उपयोग करते हैं। हालांकि, बाजार में CFL की कीमत सामान्य बल्ब की तुलना में 8 से 10 गुना ज्यादा थी, जिससे आम परिवार इन्हें खरीदने में हिचकते थे। Bachat Lamp Yojana इसी अंतर को दूर करने के लिए शुरू की गई।


Bachat Lamp Yojna क्या है और यह कैसे सस्ती रोशनी उपलब्ध कराती है

Bachat Lamp Yojana (BLY) भारत सरकार की वह ऊर्जा-दक्षता योजना है, जिसमें घरों के पुराने 60W और 100W बल्बों के बदले केवल ₹15 में CFL उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का उद्देश्य CFL की अधिक कीमत को खत्म करना और ऊर्जा बचत को जन-जन तक पहुँचाना है।

योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी लागत को Clean Development Mechanism (CDM) के तहत हासिल होने वाले Carbon Credits (CERs) से पूरा किया जाता है। यानी उपभोक्ताओं को कम कीमत पर CFL देने के बावजूद योजना आर्थिक रूप से टिकाऊ रहती है।

इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. बिजली खपत कम करना

  2. घरेलू बिजली बिल में राहत देना

  3. पर्यावरण प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाना

  4. ऊर्जा दक्षता को तेजी से बढ़ावा देना

यह योजना आज भी दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों में गिनी जाती है।


BLY का काम करने का मॉडल: सरकार, कंपनियाँ और DISCOMs की संयुक्त पहल

Bachat Lamp Yojana एक Programme of Activities (PoA) के रूप में संचालित होती है। इसमें तीन प्रमुख संस्थाएँ मिलकर काम करती हैं:

  1. BEE (Bureau of Energy Efficiency) – योजना की मॉनिटरिंग और डेटा प्रस्तुत करना

  2. DISCOMs (विद्युत वितरण कंपनियाँ) – CFL वितरण की ज़िम्मेदारी

  3. CFL सप्लायर्स/प्रोजेक्ट डेवलपर्स – उच्च गुणवत्ता वाले CFL उपलब्ध कराना

यह योजना इस तरह काम करती है:

  1. उपभोक्ता अपना पुराना बल्ब देकर ₹15 में CFL लेता है

  2. लागत का बड़ा हिस्सा CERs से पूरा होता है

  3. BEE GSM आधारित स्मार्ट मीटरिंग द्वारा उपयोग के डेटा की मॉनिटरिंग करता है

  4. डेटा UNFCCC CDM बोर्ड को भेजा जाता है

यह मॉडल पारदर्शिता, विश्वास और बड़े पैमाने पर ऊर्जा बचत सुनिश्चित करता है।


LED की तेज बढ़त: भविष्य की रोशनी और BLY का अगला चरण

CFL के बाद भारत तेजी से LED तकनीक की ओर बढ़ रहा है। LED न केवल CFL से अधिक ऊर्जा-दक्ष है, बल्कि इसकी उम्र कई गुना लंबी होती है। भारत सरकार और BEE ने LED को घर-घर पहुँचाने के लिए कई पायलट प्रोजेक्ट्स और स्ट्रीट लाइटिंग प्रोग्राम शुरू किए।

प्रमुख पहलें:

  1. 23 राज्यों में ग्रामीण LED वितरण

  2. 32 राज्यों में LED स्ट्रीट लाइटिंग प्रोजेक्ट

  3. LED की कीमतों में भारी गिरावट

  4. घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग में तेज वृद्धि

BLY के प्रभाव ने ही LED के बड़े पैमाने पर अपनाने की नींव तैयार की।

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Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें शामिल जानकारियाँ उपलब्ध सरकारी रिपोर्टों, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित हैं। समय के साथ योजनाओं में बदलाव संभव है, इसलिए किसी भी लाभ का उपयोग करने से पहले आधिकारिक स्रोत की जाँच अवश्य करें।